गलती करे कोई और ,भुगते कोई और..

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गलती करे कोई और,भुगते कोई और..

आखिर गलत करने पर अल्पसंख्यक शिक्षित समाज की चुप्पी क्यों ?

टिक टोक एवं अन्य सोशल मीडिया पर इन दिनों कई ऐसे आपत्तिजनक की वीडियोस पोस्ट हुए हैं जिसमें कुछ अल्पसंख्यक समुदाय के लोग नोट इस्तेमाल कर नाक साफ कर रहे हैं तो कुछ लोग डॉक्टरों को दौड़ाकर पीट रहे हैं। कहीं नर्सेज के साथ गलत हरकत करते तो कहीं जानबूझकर लगाया हुआ मास्क निकालकर फेंकते हैं। कई जगहों पर असामाजिक तत्वों द्वारा पुलिस पर भी पत्थरो से प्रहार किए गए हैं।

वैसे इन सभी मामलों में पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया है। मगर इसी कृत्य के बीच कुछ मासूम लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

राजस्थान के अस्पताल में ऐसे ही एक मामला सामने आया है जिसमे भरतपुर में एक गर्भवती महिला को सरकारी अस्पताल में भर्ती होने से धर्म के आधार पर मना कर दिए जाने का मामला प्रकाश में आया है, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। भरतपुर के जनाना अस्पताल पर आरोप लगे हैं कि हॉस्पिटल स्टाफ ने एक गर्भवती महिला को भर्ती करने से इस वजह से मना कर दिया क्योंकि वह मुस्लिम थी। इसके बाद महिला ने रास्ते में बच्चे को जन्म दिया, मगर उसकी मौत हो गई। 

ए एन आय के एक न्यूज़ रिपोर्ट के अनुसार ,पति का कहना है कि अस्पताल के स्टाफ ने हमें जयपुर अस्पताल रेफर कर दिया, क्योंकि हम मुस्लिम हैं। हम भरतपुर क्रॉस भी नहीं किए थे कि रास्ते में ही पत्नी ने बच्चे को जन्म दिया, मगर बच्चा बच नहीं पाया और वह मर गया।’ 

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