पालघर हिंसा मामला धार्मिक विवाद के कारण नहीं बल्कि अफवाहों के कारण हुई – गृहमंत्री अनिल देशमुख

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पालघर हिंसा मामला धार्मिक विवाद के कारण नहीं बल्कि अफवाहों के कारण हुई – गृहमंत्री अनिल देशमुख

क्राइम इन्वेस्टीगेशन डिपार्टमेंट पुणे ने बुधवार को पालघर हिंसा मामले में चार्जशीट दायर की जिसमें 2 साधुओं और उनके ड्राइवर को भीड़ द्वारा मौत के घाट उतार दिया गया था.
यह आरोप पत्र पालघर जिले के डहाणू तालुका में जेएमएफसी कोर्ट में दायर की गई .

सीआईडी पुणे के बयान के अनुसार, टीम ने आरोपियों के खिलाफ सबूत जुटाने के लिए 808 संदिग्धों और 118 गवाहों की जांच की है. कुल मिलाकर 154 लोगों को गिरफ्तार किया गया है जिसमें 11 किशोरियों को हिरासत में लिया गया है. इस मामले में अभी तक किसी भी आरोपी को जमानत पर नहीं छोड़ा गया है.

CID ने कहा कि जब दो साधु और उनके ड्राइवर 16 अप्रैल को मुंबई से गुजरात की एक वैन में यात्रा कर रहे थे, स्थानीय लोगों की हिंसक भीड़ द्वारा पलगाव जिले के तालुका दहानू के गाँव गडचिनचले में एक फ़ॉरेस्ट चेक नाका के पास उन पर धावा बोला गया और उन पर जानलेवा हमला किया गया।

तीन अलग-अलग एफआईआर में कासा पुलिस स्टेशन में तीन अलग-अलग अपराध दर्ज किए गए और पालघर पुलिस ने जांच की । 21 अप्रैल को सीआईडी ​​ने जांच का जिम्मा लिया और एसपी मारुति जगताप की अध्यक्षता वाली टीम ने अपनी रिपोर्ट कोकण भवन इकाई को सौंपा।

15 जुलाई को CID की टीम ने पालघर लिंचिंग से जुड़े तीनों मामलों में चार्जशीट पेश की।
पहले मामले में, महाराष्ट्र पुलिस पुलिस के महामारी रोग अधिनियम के आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत 126 आरोपियों के खिलाफ दहानू के न्यायालय में 4955 पन्नों की चार्जशीट डीएम एसपी और आईओ विजय पवार द्वारा सार्वजनिक संपत्ति (रोकथाम) अधिनियम 1984 के तहत दायर की गई थी।

दूसरे मामले में, एपिडेमिक डिसीज एक्ट 1897 के डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत 126 आरोपियों के खिलाफ जेएमएफसी डहाणू के कोर्ट में डीआई एसपी और आईओ इरफान शेख द्वारा महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम और सार्वजनिक संपत्ति (रोकथाम) अधिनियम 1984 के तहत 5921 पेज की चार्जशीट दायर की गई है।

फिलहाल ,किशोरों के खिलाफ पर्याप्त सबूत होने के वजह से उनके खिलाफ अलग अलग कार्यवाही शुरू की जा रही है।

महाराष्ट्र के गृहमंत्री ने ट्वीट कर कहा है की साधुओं की हत्या भीड़ द्वारा अफवाहों के कारण हुई है कुछ राजनीतिक पार्टियां इस घटना को धार्मिक रंग देने की कोशिश कर रहे थे.

 

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