अगर इस चीज का मेड इन इंडिया वर्शन आ जाए तो बुजुर्गों के लिए साबित होगा वरदान

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अगर इस चीज का मेड इन इंडिया वर्शन आ जाए तो बुजुर्गों के लिए साबित होगा वरदान

कई बुजुर्ग हो रहे इस दुर्घटना के शिकार

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बुढापा और बचपन यह दोनों परिस्थिति काफी समान होती है।
बुढापा और बचपना इन दोनों परिस्थितियों में कई समानताएं होती है। न तो ठीक से बात कर पाना, मैं तो ठीक से अपने हाथों से खा पाना ,नाही सही से चल पाना। मगर इन सभी परिस्थितियों में ढंग से नहीं चल पाने के कारण कई ऐसे बुजुर्ग है जिनकी उम्र 50 से है वह अधिकतर हिप फ्रैक्चर के शिकार हो जाते हैं।

हिप फ्रैक्चर जैसी दुर्घटना बुजुर्गों के लिए काफी डरावनी साबित होते जा रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इस दुर्घटना में बुजुर्ग अधिकतर बेडरिडेन हो जाते हैं। जब बुजुर्ग बेडरिडेन हो जाते हैं ऐसी अवस्था में उनके लिए परिवार के लोगों को विशेष ध्यान देना पड़ता है।

इस रोजमर्रा जिंदगी में आज समय का अभाव होने के कारण ऐसे कई वारदातें सामने आए हैं जहां बच्चे ऐसे वृद्ध अवस्था में अपने माता पिता पर नहीं दे पाते। खासकर अगर वृद्ध अवस्था में माता-पिता बेडरिडेन हो जाते हैं फिर तो उस बुजुर्गों को भगवान ही बचाए। हिप फ्रैक्चर अब आम बात हो चुकी है जिसे हर व्यक्ति को उसकी वृद्धावस्था में सामना करना पड़ सकता है।

हेलाइट नामक एक विदेशी कंपनी है जो ऐसे वृद्धावस्था में वेस्ट बेल्ट बनाती है। इस वेस्ट बेल्ट की खासियत है कि जैसे ही बुजुर्ग गिर जाता है ठीक उसी वक्त कुछ सेकेंड से भी कम समय में सेंसर के माध्यम से उसके एयर बैग्स खुल जाते हैं और गिरने वाले बुजुर्गों को हिप फ्रैक्चर जैसी दुर्घटना से बचाती है।

अगर भारत में मेड इन इंडिया के तर्ज पर अगर बड़ी संख्या में मैन्युफैक्चरिंग कराई जाए तो भविष्य में यह हर बुजुर्ग के लिए वरदान साबित हो सकती हैं। यह बात भी उतनी ही सत्य है कि हर उस व्यक्ति को इस अवस्था से गुजरना ही पड़ता है।

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