चरसी गरदुल्ले एक गंभीर समस्या …

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चरसी गरदुल्ले एक गंभीर समस्या …

गंभीर गुनाहों में किया जा सकता है इस्तेमाल

मुंब्रा ,अंबरनाथ , कुर्ला , भिवंडी कलवा, मलाड ,कांदिवली जैसे क्षेत्रो में चरसी गरदुल्ले से समाज का कई तबका परेशान हो रहा है। चरसी गरदुल्ले को अगर लगातार नशा नहीं मिलता तोह उन नशेड़ियों की मानसिक स्थिति काफी उग्र हो जाती है। ऐसे स्थिति में वह काफी आक्रामक हो जाते हैं। नशा मिलने हेतु ऐसे नशेड़ी कोई भी बड़ा कदम उठाने तैयार हो जाते हैं।

नशा नहीं मिलने के कारण यह नशेड़ी घर के सामान तक बेच देते हैं।अगर नशा को पैसे नहीं मिले तो किसी से भी छीना झपटी कर लेते हैं। नशेड़ी यह कृत्य जानबूझकर नहीं करते परंतु उनकी मानसिक स्थिति उन्हें ऐसे करने पर मजबूर कर देती है।ऐसे मानसिक स्थिति में इन नशेड़ियों को कोई भी असामाजिक तत्व इस्तेमाल कर सकता है।

इन गुनाहों में चोरी , डकैती , खून , लूटपाट जैसे घटनाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है।सबसे विशेष बात यह है कि इनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उनपर कोई मजबूत केस नहीं बनता और आसानी से कानूनी कार्यवाही से मुक्ति मिल जाती है। कभी कभी यह नशेड़ी पुलिस पर भी जानलेवा कर देते हैं। पर पुलिस सिवाय इन्हें पकड़ने के और कुछ नहीं कर सकती है। इसलिए कभी कभी पुलिस के आगे भी इन्हें पकड़ना एक आवाहन के स्वरूप होता है। इन्हें पकड़ते वक़्त कभी कभी पुलिस भी सेल्फ डिफेंस के मोड़ में आती है, ऐसे वक्त में उनपर भी एलीगेशन चला जाता है और उनकी नोकरी खतरे में आ जाती है।
ऐसे नशेड़ी आरोपी को पकड़ने में पुलिस का मनोबल भी काफी कम हो जाता है। पुलिस की छोटी सी गलती से उनकी नोकरी पर आँच आती है। उनकी शिकायत मानवाधिकार तक चली जाती है। ऐसे वक्त में कानूनी सीमित शक्तियों के कारण पुलिस भी इन्हें पकड़ने में नीरसता दिखाती है।

नशेड़ीओ द्वारा पुलिस पर हमले, नागरिकों पर हमले, कभी-कभी तो अपने संबंधितो पर भी हमलों की घटना कई बार सुनने में आती है।

कुछ महीनों पहले नशेड़ियों ने जब मुंब्रा और दीवा के बीच रेलवे फाटक पर एक 22 फुट का लोहे का रॉड मजाक मजाक में रख दिया था। इस छोटे से मजाक से हजारों जिंदगी आ तबाह होने वाली थी। पुलिस के हरकत में आते ही एक बड़ा हादसा टल गया। इसलिए नशेड़ियों को नियंत्रित करना समाज के हित के लिए बेहद जरूरी हो गया है।

क्या करना होगा इन नशेड़ी यों को अगर काबू में लाना है तो

1) हर शहर में सरकारी नशामुक्ति केंद्र की स्थापना हो। अगर कोई नशेड़ी गंभीर गुनाह में लिप्त हो ऐसे नशेड़ी ओं को जेल में रखना बिल्कुल समझदारी नहीं होगी। क्योंकि वह नशेड़ी लगातार करने वाले नशे के कारण इतना आदी हो जाता है कि उसकी मानसिक स्थिति जेल के अंदर भी और बिगड़ जाएगी। दूसरे कैदियों पर हमले बढ़ने लगेंगे।

2) इसलिए ऐसे नशेड़ीओं को जेल में न रखते हुए सरकारी नशा मुक्तिकेंद्र में भर्ती कर देना चाहिए।

3) हर जिले में हर शहर में इन नशेड़ीओं की वैद्यकीय जांच कर नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कर देना चाहिए।

4) नशेड़ीओं को शहर में खुला छोड़ना खतरे से खाली नहीं होता क्योंकि इनका मानसिक संतुलन काफी बिगड़ा हुआ होता है और इनके शहर में घूमने से कोई भी अप्रिय घटना होने की संभावनाएं बनी रहती है।

5) नशेड़ीओं को नशामुक्ति केंद्र में भर्ती करने के बाद कुछ ही महीनों में वाह नशेड़ी अपनी सामान्य जिंदगी बिताना शुरू करता है।

6) इस उपक्रम से कोई भी परिवार बर्बाद नहीं होता बल्कि वह सुधर जाता है साथ साथ समाज भी सुधर जाता है। समाज नशा मुक्त हो जाएगा और क्राइम का ग्राफ भी घट जाएगा।

नशेड़ियों के हमलों के कुछ न्यूज़ रिपोर्ट

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