मानवाधिकार संस्थाए एवं अंतरराष्ट्रीय मीडिया कर रही है पुलिस पर हुए हमलों को अनदेखा

0
96

मानवाधिकार संस्थाए एवं अंतरराष्ट्रीय मीडिया कर रही है पुलिस पर हुए हमलों को अनदेखा

मानवाधिकार संघटनो के हस्तक्षेप से घट रहा है पुलिस का मनोबल

देश के नागरिक कर रहे है पुलिस का जयघोष

जब भी कोई मुसीबत आए या आपत्ति पुलिस हमेशा ही देश के नागरिकों के लिए सदैव तत्पर रहती है। जब से देश मे CAA का कानून पारित हुआ है विरोध के नाम पर पूरे देश मे कुछ असामाजिक तत्वों ने अफरा तफरी मचा रखी है। पब्लिक प्रॉपर्टी ही नहीं बल्कि पुलिस को भी टारगेट किया गया है।

उत्तर प्रदेश पुलिस के एक ट्वीट द्वारा यह जानकारी दी है की इस विरोध प्रदर्शन में कुछ दंगाइयों ने करीबन 250 पुलिस वालों को जख्मी कर दिया है। 60 पुलिस फायर होने की वजह से गंभीर रूप से घायल है। प्रदर्शनकारियों से 700 कारतूस भी बरामद होने की बात बताई गई है।


ह्यूमन राइट्स वॉच नामक संस्था ने प्रदर्शनकारीयों पर होने वाली पुलिसी कार्यवाही पर चिंता व्यक्त की है। मात्र इतना ही नहीं बड़े बड़े अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी प्रदर्शनकारियों एवं दंगाइयों के लिए विदेशी संस्थाओं तक आवाज़ उठाई है।

सोशल मीडिया में जनमत मानते है की इन विदेशी मीडिया एवं मानवाधिकार संस्था की एकतरफा रिपोर्टिंग से पुलिस का मोराल काफी घटने लगा है। मानवाधिकार संघटनो के दबाव में पुलिस का मोराल घटना देश के लिए शुभ संदेश बिल्कुल नहीं है। मानवाधिकार संगठनों को लेकर देश के नागरिकों में काफी रोष दिखाई पड़ता है।लोगों का मानना की मानवाधिकार ऐसे दंगाई के साथ खड़ी रहती है जो पुलिस को बर्बरता से मारती है, पिटती है। पुलिस को मारने, पीटने और फायर करने वाले कोई आम नागरिक है ? ऐसे तमाम सवाल सोशल मीडिया पर उठ रहे हैं।

मगर वहीं दुसरी तरफ देश के नागरिकों ने मात्र पुलिस के कार्यो की सराहना भी एवं उनके साथ मजबूती से खड़े हैं। CAA के अधिकतर रैलियों में पुलिस के जयजयकार के नारे देखने और सुनने मिले। दिशा बलात्कार कांड में भी लोगो ने पुलिस के कार्य की सराहना की थी। अगर इसी तरह अगर मानवधिकार संगठन आरोपियों और ऐसे असामाजिक तत्वों के साथ खड़ी रहती है तो स्थिति काफी बिगड़ सकती है।

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.