भिवंडी का सरकारी इंदिरा गाँधी अस्पताल, ऑरेंज हॉस्पिटल और ऑर्बिट हॉस्पिटल बना गरीबों के लिये मुसीबत…

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भिवंडी का सरकारी इंदिरा गाँधी अस्पताल, ऑरेंज हॉस्पिटल और ऑर्बिट हॉस्पिटल बना गरीबों के लिये मुसीबत…

भिवंडी का सरकारी इंदिरा गाँधी अस्पताल, ऑरेंज हॉस्पिटल और ऑर्बिट हॉस्पिटल बना गरीबों के लिये मुसीबत…

भिवंडी में कोरोना के प्रसार के बाद राज्य उप जिल्हा रुग्णालय इंदिरा गाँधी स्मृति रुग्णालय को कोरोना रुग्णालय में बदला गया है और भिवंडी के ऑरेंज हॉस्पिटल और ऑर्बिट हॉस्पिटल को प्रसूति और अन्य बीमरी के लिए रूपांतरित कर दिया गया है। अधिसूचना अनुसार इन अस्पतालों में गरीबों का मुफ्त इलाज होना था पर यह अस्पताल स्वयं बीमारी का शिकार है। ऐसी कई खबरें आई जिसमे इन अस्पतालों ने मरीजों को भर्ती करने में आनाकानी की और कई बहाने बाजी की। शहर के सामाजिक संस्थाओं द्वारा दवाब डालने के बाद ही कुछ मामलों में सफलता मिली। संवाद फाउंडेशन के गोविंद शर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कम से कम ३ ऐसे गर्भवती महिलाओं को संवाद फाउंडेशन के हस्तक्षेप के बाद ही ऑरेंज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। ऐसे ही एक केस में कोमडपाड़ा निवासी गर्भवती महिला निर्मला बल्लू को कई बार ऑरेंज हॉस्पिटल ने भर्ती करने और डेट देने से इंकार कर दिया और डॉ विद्या शेट्टी संचालित प्राइवेट अस्पताल में जाने के लिए कहा गया। संवाद फाउंडेशन द्वारा फिर से हस्तक्षेप करने के बाद एवं डॉ अनिल थोरात से बात करने के पश्चात इस मामले को देखने का आश्वासन दिया गया। इसी तरह की शिकायतें ऑर्बिट हॉस्पिटल से भी आ रही है। रुग्णों को मुंबई या प्राइवेट अस्पताल जाने के लिए कहा जा रहा है। ऐसे में भिवंडी जो बहुतांश मजदूरों का शहर है और गरीब है, उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और मनपा के मुख्य चिकित्स्क अधिकारी, आयुक्त और उपायुक्त या तो फ़ोन नहीं उठाते हैं या पहुँच के बाहर हैं और इसका खामियाजा सामान्य जनता को भुगतना पड रहा है। वहीँ ऑरेंज हॉस्पिटल की मनमानी पुरे जोरों पर जारी है। डॉ अमोल बिटकर द्वारा जहाँ गर्भवती महिलाओं को प्राइवेट अस्पताल में भेजने का काम पुरे जोर शोर से किया जा रहा है , जब इसकी शिकायत संवाद फाउंडेशन द्वारा डॉ अनिल थोरात और विद्या शेट्टी से की गयी तो गर्भवती महिला जो १५ मार्च से ही भिवंडी में है उसे कोरोना टेस्ट करवाने के लिए कहा गया। यदि कोरोना टेस्ट आवश्यक था तो चार धक्कों के बाद क्यों कहा गया ?
वहीं एक दूसरे पेशेंट ने रोते हुए अपनी आप बीती सुनाते हुए कहा कि जब जैसे तैसे गर्भवती महिला को ऑरेंज अस्पताल में प्रसव पीड़ा के बाद भर्ती कराया गया वहां उसे कोई देखभाल नहीं किया गया और उस गरीब महिला को कर्ज लेकर एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

ऑर्बिट हॉस्पिटल, भिवंडी

परेशान हो रहे नागरिकों ने आक्रोश व्यक्त करते हुये कहा है कि यहाँ के सरकारी अस्पताल इंदिरा गाँधी में डॉक्टरों की भर्ती किस प्रकार की गई है इसकी जांच हो क्योंकि यहाँ के डॉक्टर बहुत लापरवाह हैं।

भिवंडी शहर की नामी संस्था MPJ जो राशन दुकान और सरकारी अस्पताल इंदिरा गाँधी अस्पताल में भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाती आयी है उन्होंने भी पूर्व में स्वर्गीय इंदिरा गाँधी अस्पताल में कई गड़बड़ियों का खुलासा किया है और राज्य सरकार से पत्र व्यवहार भी किया है लेकिन कभी कोई ठोस कार्यवाही नही हुई।

कोरोना के लॉक डाउन का मार झेल रहे गरीबों को इस तरह सरकारी अस्पताल में व्याप्त भ्रस्टाचार और अव्यवस्था का शिकार होना पड रहा है।
राज्य सरकार को इसपर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और कार्यवाही करनी चाहिये।

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