स्मार्टफोन वंचित विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए एक सुझाव

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स्मार्टफोन वंचित विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए एक सुझाव

ट्यूशन बन सकते हैं स्कूल से अच्छे पर्याय

औसतन स्कूल में हर वर्ग में 30 से 40 बच्चे पढ़ते

ट्यूशन में पढ़ते हैं केवल 5 से 10 बच्चे

छोटी-छोटी टुकड़ियों में पढ़ाई शुरू की जा सकती है।

कोविड-19 महामारी के कारण भले ही कई व्यवसाय शुरू हो चुकी है मगर अभी तक और अन्य शिक्षण संस्था को अभी तक हरी झंडी नहीं प्राप्त हुई है।
बच्चों के स्वभाव में बदलाव
पिछले कई महीनों से बच्चों के स्वभाव में बदलाव देखने को मिला है। बच्चों को सोशल नेटवर्किंग प्राप्त नहीं होने के कारण बच्चों पर मानसिक प्रभाव भी अप्रत्यक्ष तौर पर पड़ने लगा है। और इसकी मुख्य वजह है बच्चो का बच्चो से दूर हो जाना।
गरीब विद्यर्थियों को स्मार्टफोन नहीँ होने से रहने लगे शिक्षा से वंचित
सामान्य तौर पर देशभर में ऑनलाइन टीचिंग शुरू हो चुकी है। मगर आज भी कई ऐसे परिवार है जिनकी स्मार्टफोन तक खरीदने की हैसियत नहीं होती। कई ऐसे परिवार हैं जिनके घर में केवल 1 स्मार्टफोन होते हैं और वह स्मार्टफोन बच्चों के केवल पिता के पास होते हैं। बच्चों के माता-पिता को काम पर जाना पड़ता है और इसी वजह से वह एक स्मार्टफोन भी उस बच्चों के नसीब में नहीं होता।
बच्चों का पढ़ाई से बढ़ रही है नीरसता
सामान्य तौर पर बच्चों के लिए भूल जाना एक आम बात है। मगर इस लॉकडाउन के कारण बच्चों को पिछले कई महीनों से घर में ही रहना पड़ रहा है। स्मार्टफोन नहीं होने के कारण बच्चों का पढ़ाई के प्रति नीरसता भी काफी हद तक बढ़ते जा रही हैं। पिछले वर्षों की जो भी पढ़ाई बच्चों ने पड़ी है अधिकतर बच्चे उस पढ़ाई को भूल चुके हैं।
ट्यूशन बन सकता है एक अच्छा पर्याय
कोविड-19 महामारी के भय से अभी तक माता पिता में बच्चों को स्कूल भेजने में असहमति अभी भी बनी हुई है। वैसे बच्चो को कोविड का खतरा उनके माता पिता के काम पर जाने से होने की संभावना भी बनी रहती है क्योंकि बाहर जाने वाला व्यक्ति कई लोगों के संपर्क में वैसे भी आ ही जाता है। मगर इसके विपरीत कुछ ऐसे माता-पिता हैं जो बच्चो को भेजने के पक्ष में भी है। स्कूल में वैसे तो प्रति वर्ग औसतन 30 से 40 बच्चे एक साथ पढ़ते हैं। सभी 10 वर्ग के कक्षा मिलाकर पूरे स्कूल में एक साथ 400 से 500 बच्चे एक साथ स्कूल में आते हैं। ऐसे में बीमारी फैलने का खतरा ज्यादा होता है।
ट्यूशन में प्रति बैच 5 से 10 बच्चे ही पढ़े जाते हैं। दूसरा बैच तभी लिया जाता है जब पहला बैच खत्म हो जाता है। ऐसे में स्कूल से बेहतर पर्याय ट्यूशन बन सकता है क्योंकि बच्चों की संख्या स्कूल के मुकाबले काफी कम हो जाती हैं। इस प्रकार छोटी-छोटी टुकड़ियों में अगर शिक्षकों को सरकार से अनुमति मिल जाती है तो बच्चों के साथ साथ शिक्षकों का भी भला किया जा सकता है। अगर यह अनुमति सरकार दे दे तो स्मार्टफोन से वंचित बच्चे भी पढ़ पाएंगे साथ साथ शिक्षकों की रोजी रोटी भी बराबर चलती रहेंगी।
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