व्यवसाय ,नोटबुक लिखने का बोझ सहे बच्चे हर रोज रोज..

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व्यवसाय नोटबुक लिखने का बोझ, सहे बच्चे हर रोज रोज..

व्यवसाय ,नोटबुक लिखने का बोझ सहे बच्चे हर रोज रोज..

शिक्षा का स्तर बद से बदतर होते जा रहा है। ट्रू ब्लिट्ज की टीम ने जब जमीनी स्तर पर ग्राउंड रिपोर्टिंग की तो उसमें पाया गया अधिकतर बच्चों को ठीक से पढ़ना तक नहीं आता। अधिकतर बच्चे स्पेलिंग तक नहीं बता पाए। कुछ गणित के प्रश्न पूछने पर भी जवाब निराशाजनक थे। काफी बच्चों को ठीक से इंग्लिश तक बोलने नही आती । ऐसी शिकायत बच्चों के अभिभावकों ने हमसे बताई ।
बच्चों से जब हमने व्यक्तिगत संपर्क किया तो उन्होंने प्रथम बात करने से ही मना किया क्योंकि उन्हें ऐसा डर था कहीं उनकी स्कूलिंग पर संकट ना आ जाए। इन बच्चों की समस्या है की उन्हें हर विषय के व्यवसाय पूरे करने होते हैं। जैसे ही व्यवसाय पूरा हो जाता है फिर पुस्तक के पीछे के प्रश्न उत्तरों को फिर से नोटबुक में लिखने कहा जाता है। इन्हीं कामों के वजह से बच्चो का समय सिर्फ लिखने मात्र में बीत जाता है। जैसे ही बच्चे कुछ पढ़ाई याद करने जाते हैं तो असाइनमेंट देने पर वे और भी परेशान हो जाते हैं।

जब हमारी टीम ने बच्चों से बहुत ही आत्मीयता से पूछा तब एक बात और पता चली कि उनके पाठ की रीडिंग शिक्षक केवल पाठ पढ़ाते वक्त ही लेते हैं ।यही एक प्रमुख कारण है कि बच्चे स्कूल जाने के बाद भी रीडिंग नही कर पाते ।
अभिभावकों का कहना है कि यह व्यवसाय एवं नोटबुक में लिखने से किसी प्रकार का बदलाव नहीं आने वाला क्योंकि इतना लिखना सिर्फ और सिर्फ मजदूरी है जिससे बच्चो की ज्ञान में वृद्धि दूर दूर तक नही दिखती ।

अभिभावकों का कहना है कि बच्चो में सिर्फ 4 पॉइंट प्रोग्राम से पूर्ण रूप से परिणाम आएगा ।
1) ठीक से पढ़ने आना
2)ठीक से लिखने आना
3) लिखा हुआ का अर्थ समझ मे आना
4)समझा हुआ अर्थ सबको बताने आना

अभीभावकों का तर्क है कि इन 4 पॉइंट प्रोग्राम से शिक्षा में क्रांति आएगी नाकि होमवर्क से ….

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