शिवसेना के मुखपत्र सामना से पहले यह बुरखा बंदी का विवाद यहाँ से हुआ शुरू

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शिवसेना के मुखपत्र सामना से पहले यह बुरखा बंदी का विवाद यहाँ से हुआ शुरू

मुखपत्र सामना को बेवजह किया जा रहा है टारगेट

विवाद की शुरुआत मुस्लिम एजुकेशन सोसाइटी (केरल) से हुई

केरल : केरल मुस्लिम एजुकेशनल सोसायटी ने अपने 150 शैक्षणिक संस्थानों में ऐसे कपड़ों पर बैन लगाया है जिसमें उन विद्यार्थियों का चेहरा ढका हो। मुस्लिम एजुकेशन सोसायटी ने अपने सर्कुलर में वैसे नकाब शब्द का इस्तेमाल कहीं नहीं किया है मगर मुस्लिम एजुकेशन सोसायटी ने अपने कैंपस में किसी तरह के कपड़े जिसमें चेहरा ढका जाता हो ऐसे ड्रेस कोड को मान्यता देने से साफ मना कर दिया है। यहां सर्कुलर मुस्लिम एजुकेशन सोसायटी के स्टेट प्रेसिडेंट फ़ज़ल गफूर ने 19 अप्रैल को जारी किया था।
एजुकेशन सोसाइटी के अंतर्गत 10 प्रोफेशनल कॉलेज,18 आर्ट्स साइंस कॉलेज, 12 हायर सेकेंडरी कॉलेज एवं 36 सी बी एस ई एफिलिएटिड स्कूल्स है।
फ़ज़ल गफूर का कहना है कि उन्होंने यह सर्कुलर श्रीलंका में लिए गए निर्णय से पूर्व ही जारी कर दिए गए थे।
कुछ मुस्लिम संस्थाओं ने मुस्लिम एजुकेशन सोसायटी के निर्णय का विरोध किया की एमईएस को मुस्लिम समाज के धार्मिक आजादी में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।  फ़ज़ल गफूर का कहना है इस विषय को बेवजह ज्यादा कंट्रोवर्शियल बनाया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने यह निर्णय हाई कोर्ट के गाइडलाइंस पर ली है जिसमें साफ तौर पर लिखा है की शैक्षणिक संस्थाओं को अपना ड्रेस कोड रखने की पूर्ण आजादी है।

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