मेघालय सरकार द्वारा हिन्दू मूलनिवासियों को छठवें अनुसूची से बाहर रखना गैर संविधानिक -लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी (LRO)

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मेघालय सरकार द्वारा हिन्दू मूलनिवासियों को छठवें अनुसूची से बाहर रखना गैर संविधानिक -लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी (LRO)

बन सकते है कश्मीरी पंडितों के तरह हालात

मेघालय के पहाड़ी क्षेत्र में गारो पहाड़ियों क्षेत्र में हाजोंग ,कोच राभा, बोलो और मान नामक हिंदू जनजातियों पिछले कई सैकड़ों सालों से यहां के मूल निवासी माने जाते हैं। मूलनिवासी होने के नाते उन्हें छठवीं अनुसूची में होने का प्राकृतिक अधिकार है जिसे कोई भी कानून अस्वीकार नहीं कर सकती।

लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी के अनुसार मेघालय सरकार इन मूलनिवासियों को छठवीं अनुसूची से बाहर रखकर इनके प्रावधानों से वंचित रखने की कोशिश की जा रही हैं। इस एकतरफा निर्णय को LRO ने असंवैधानिक करार दिया है।

छठवीं अनुसूची मैं हिंदू जनजातियों को अलग रखने से आदिवासीयों का अधिकारों का हनन हो रहा है। ऐसे करने से सभी बांग्लादेशी शरणार्थी वैध तरीके से वहाँ के नागरिक बन जाएंगे। छठी अनुसूची से इन मूल निवासियों को बाहर रखकर सरकार इन्हें तीसरे दर के नागरिक घोषित करने की कोशिश कर रही हैं।

लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी ने इस संदर्भ में मेघालय सरकार को ज्ञात कर इन हिंदू जनजातीय मूलनिवासी को छठवे अनुसूची से बाहर रखने का निर्णय इन मूलनिवासियों के साथ अन्यायपूर्ण और गैर संविधानिक और अतार्किक बता दिया है।

LRO के मुताबिक ,अगर इन्हें छठी अनुसूची से बाहर रखते हैं तो इन मूल निवासियों की परिस्थिति ठीक कश्मीरी पंडितों की तरह हो सकती है।

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