कैसे रचा जाता है हिंदू आतंकवाद का नैरेटिव ?

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कैसे रचा जाता है हिंदू आतंकवाद का नैरेटिव ?

हिंदू धर्म और आस्था का मजाक बनाना अब आम बात हो गई है। बॉलीवुड इस मामले में पी एच डी कर चुका है। एंटरटेनमेंट और फ्री स्पीच के नाम पर हिंदू आस्था को ठेस पहुंचाने का एक भी मौका छोड़ा नहीं जाता है।
एंटरटेनमेंट जीवन का अविभाज्य हिस्सा है। इसके बिना हमारा जीवन अधूरा है मगर एंटरटेनमेंट आड़ में एक हिडन एजेंडा चलाया जा रहा है। जिसे कई लोग जान नहीं पा रहे हैं। जिसमें प्रमुख रूप से हिंदू धर्म और हिंदू आस्था को जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है।
कुछ साल पहले (Da Vinci Code) डा विंसी         कोड नामक एक फिल्म बनी थी। यह फिल्म भी फ्री स्पीच का ही हिस्सा थी। मगर इस फिल्म में ईसाई धर्म के लोगों की आस्था को ठेस पहुंची थी। इस फिल्म में ईसा मसीहा को एक विवाहित पुरुष के रूप में दर्शाया गया था। देश के 16 परसेंट ईसाई समुदाय लोगों की भावना आहत होते देख डा विंसी कोड फिल्म की स्क्रीनिंग पर पूर्णता रोक लगा दी गई।
मगर इसी भारतीय लोकतंत्र में 78% हिंदू समुदाय के लोगों की भावनाओं को खुलेआम फ्री स्पीच के नाम से धज्जियां उड़ाई जाती है। जहां आज देश में राइट टू इक्वलिटी की बात की जाती है वहीं आज हिंदू धर्म के लोगों के साथ जानबूझकर सौतेला व्यवहार किया जाता है।
हाल ही में (India’s Most Wanted ) इंडियास मोस्ट वांटेड नामक एक फिल्म रिलीज होने जा रही है। यह फिल्म राजकुमार गुप्ता द्वारा लिखी एवं दिग्दर्शक की गई है। यह फिल्म 24 मई 2019 को रिलीज होने वाली है। यह फिल्म रिलीज होने से पहले ही सवालों के घेरे में आ चुकी है।
इस फिल्म में 2007 से 2013 के बीच हुए 52 ब्लास्ट के बारे में स्क्रिप्ट लिखी गई है। जिसमें 810 लोग जख्मी और 433 लोग मारे गए थे। यह सभी हमले आतंकियों द्वारा अलग अलग शहरों में किए गए थे। मगर इस फिल्म के में कुछ विवादित डायलॉग्स का इस्तेमाल किया गया है। वह डायलॉग्स कुछ इस प्रकार है। ” आत्मा कभी मरती नहीं, शरीर मरता है। मैं लोगों को मार नहीं रहा हूं, बस उनकी आत्मा को दूसरे शरीर में भेज रहा हूं। यह मैं नहीं कह रहा हूं गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है”।
आतंकी हमलों को इस श्लोक से जानबूझकर जोड़ा जा रहा है। यह छिपा एजेंडा में कई चीजों को एक साथ टारगेट किया जा रहा है।
1) गीता को आतंक से जोड़ना।
2) हिंदू धर्म के लोगों की आस्था को ठेस पहुंचाना।
3) टीआरपी बढ़ाना।
4) हिंदुओं को हिंसा करने के लिए उकसाना जिससे हिंदू टेरर याने हिंदू आतंकवाद का नैरेटिव बनाने में आसानी हो।

क्या होंगी परिणाम?

देशभर में हिंदुओं के साथ फ्री स्पीच के नाम पर अगर यही सौतेला व्यवहार होता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब हिंदू अपने धर्म को बचाने के लिए एवं अपमानित होने से रोकने के लिए हिंसा का सहारा लेगा। फिर यही हिंसा पर हिंदू आतंकवाद का नैरेटिव बनाने वाले लोग जाग जाएंगे। और इस हिंसा के खिलाफ बड़े-बड़े लेख छापे जाएंगे जिसकी चर्चा फ्रंटलाइन न्यूज़ एवं अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ की सुर्खियों में होंगी। फिर इस हिंसा को लेकर अंतर्राष्ट्रीय खबर बनाई जाएगी और संयुक्त राष्ट्र में कुछ हिंदुत्ववादी संगठनों पर बंदी के लिए आवाजे उठेंगी।

क्या है इसका निवारण?

फ्री स्पीच बचाने हेतु IPC सेक्शन 295A को ताक पर नहीं रखना चाहिए। ऐसी फिल्मों पर, ऎड एजेंसीज पर तुरंत नोटिस इशू कर उनका लाइसेंस रद्द कर देना चाहिए । क्योंकि इन एंटरटेनमेंट के नाम पर देश की आंतरिक शांति और सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।इसलिए ऐसे कंपनीज पर रासुका के तहत मामला दर्ज करना चाहिए।
या फिर सांसद में Blasphemy Law बनाने होंगे।जिसमे किसी भी धर्म का इस्तेमाल एंटरटेनमेंट के नाम पर कभी नहीं किया जाएगा।

 

Blog :By  Anonymous

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