भारत को घेरने के लिये पाकिस्तान लगा रहा है लोमड़ी की बुद्धि

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भारत को घेरने के लिये पाकिस्तान लगा रहा है लोमड़ी की बुद्धि

4 फरवरी 2019 को ब्रिटेन में जम्मू कश्मीर के विवाद को लेकर एक महासम्मेलन का आयोजन किया गया था।
भारत ने इस महासम्मेलन को रोकने के लिए ब्रिटिश उच्चायोग के साथ जोरदार आपत्ति जताई थी और इसे रोकने के लिए कहा था।
ब्रिटिश उच्चायोग ने ऐसा करने से मना कर दिया और यह कारण दिया की ब्रिटिश सांसद किसी भी महा सम्मेलन में भाग लेने के लिए स्वतंत्र हैं और सरकार द्वारा उन पर इस तरह के आयोजन में भाग ना लेने के लिए कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता|
इस महासम्मेलन के आयोजक ब्रिटिश सांसद और ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप ऑन पाकिस्तान के अध्यक्ष रहमान चिश्ती थे।

मुख्य उपस्थिति:
मखदूम शाह महमूद कुरैशी, विदेश मंत्री, पाकिस्तान
सरदार मसूद खान, अध्यक्ष, आजाद जम्मू एंड कश्मीर
मुशाहिद हुसैन सैयद, अध्यक्ष, सीनेट फॉरेन अफेयर्स कमिटी
एमपी डेबी अब्राहम, अध्यक्ष, ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री कश्मीरी ग्रुप
केजेल मेग्ने बॉन्डविक, पूर्व प्रधानमंत्री, नॉर्वे
सरदार अतीक अहमद, पूर्व प्रधानमंत्री, आजाद जम्मू और कश्मीर
बैरिस्टर सुल्तान महमूद
पाकिस्तान उच्चायुक्त नफीस जकारिया

अन्य उपस्थिति:
पाकिस्तान सीनेट की विदेश मामलों की समिति के सदस्य, ब्रिटिश सांसद, महापौर, लॉर्ड्स और पार्षद, कश्मीरी नेता, शिक्षाविद, नागरिक संगठनों के सदस्य, मीडिया प्रतिनिधि, विद्यार्थी, ब्रिटिश पाकिस्तानी समुदाय के लोग इत्यादि।

मुख्य चर्चा:
नॉर्वे के पूर्व प्रधानमंत्री बॉन्डविक, ऑस्ट्रेलिया की पूर्व सीनेटर रियानॉन और ए पी पी के जी के चेयरमैन डेवी अब्राहम ने संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट और अध्यादेशों को ध्यान में रखते हुए कश्मीर विवाद पर आगे कौन सा रास्ता लिया जाए उसकी चर्चा की।

सीनेट के सदस्यों ने कश्मीर विवाद के कानूनी वैधता पर प्रकाश डाला।

मानवाधिकार (ओ एच सी एच आर), ए पी पी के जी और ओ आई सी आई पी एच आर सी के उपाध्यक्ष प्राध्यापक डॉक्टर रिहाना बिनती अब्दुल्ला ने कहा कश्मीर में भारत द्वारा किया जा रहे मानवाधिकारों का उल्लंघन सबसे लंबे समय तक किया जानेवाला मानवाधिकारों का उल्लंघन है। आगे उन्होंने यह कहते हुए कि,भारत ने कश्मीर को कब्रगाह बना दिया है सारे अंतरराष्ट्रीय समुदाय से गुजारिश की कि, सयुंक्त राष्ट्र की जाँच आयोग को कश्मीर दौरा करने की अनुमति देने के लिये प्रबल दबाव बनाया जाये।

पाकिस्तान विदेश मंत्री कुरेशी ने कहा जम्मू कश्मीर जो भारत पाकिस्तान के बीच मुख्य विवादित मुद्दा है, जब तक यह सुलझ नही जाता इस क्षेत्र का विकास बाधित रहेगा। विश्व के जिम्मेदार राष्ट्रों को भारत अधिकृत जम्मू और कश्मीर के लोगो के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भूलना चाहिये क्योंकि इसके दूरगामी विनाशकारी परिणाम होंगे। अपनी बात को आगे रखते हुये उन्होंने यह भी कहा कि, सयुंक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से प्रस्तावों द्वारा मान्यता प्राप्त अधिकारों का उल्लंघन लगातार भारत द्वारा इनकार किया जाता रहा है और इसकी सजा से भी भारत का बचते रहना इम्प्यूनिटी की एक मिसाल है।

ऊपर दी गयी जानकारी से आप समझ गए होंगे कि पाकिस्तान अपनी लोमड़ी बुद्धि लगा रहा है। एक तरफ़ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान कहते है कि, भारत शांति की ओर एक कदम बढ़ाएगा तो हम दो कदम बढ़ाएंगे दूसरी ओर वह विश्व समुदाय में भारत को बदनाम करने की साजिश भी रच रहा है। जिस सयुंक्त राष्ट्र के प्रस्तावों की बात करके पाकिस्तान कश्मीर का रोना रो रहा है उसी सयुंक्त राष्ट्र के कश्मीर मुद्दे के प्रस्ताव की धज्जियाँ उसने सालों से उड़ाई हैं। कुलभूषण जाधव के मुद्दे पर भी उसने संयुक्त राष्ट्र के कई नियमों का उल्लंघन किया है और अंतरराष्ट्रीय अदालत के आदेशों का भी पालन नही किया है।

सेना को भारत सरकार द्वारा मिली खुली छूट के कारण कश्मीर में आतंकवादी भेज कर कश्मीर को अस्थिर करनेवाली उसकी राणनीति काम नही कर रही है, इसलिये वह अब नए रास्ते अख्तियार कर रहा है। जहाँ तक सब जानते हैं कि, पाकिस्तान आतंक की फैक्ट्री है और इन्ही मसलों में उलझा पाकिस्तान अपने नागरिकों को मूलभूत सुविधा देने में फिसड्डी साबित हो रहा है वहीं दूसरी ओर अपने गलत नियत को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी दोहरी बेज्जती करवा रहा है।

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