अग्निशस्त्र (Firearms) की मुस्लिम से ज्यादा महिलाओं को है जरूरत

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अग्निशस्त्र (Firearms) की मुस्लिम से ज्यादा महिलाओं को है जरूरत

महिला और नाबालिग लड़कियाँ है सबसे ज्यादा है पीड़ित

हिंदुस्थान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद के मार्गदर्शन में 26 जुलाई को अग्निशस्त्र को कैसे रखे जाए इसपर कानूनी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन रखी जाने वाली है। इस कैम्प में मुस्लिम समाज के साथ SC/ST के लोगों को भी अग्निशस्त्र रखने का कानूनी प्रक्रिया समझाई जाएगी। यह कैम्प ओल्ड लखनऊ के बड़ा इमामबारा में रखा जाएगा।

आपको बता दें, यह कैम्प को रखने की मुख्य वजह बढ़ते मॉब लीनचिंग बताई जा रही है। यह कैम्प की शुरुआत लखनऊ में की जाएगी और फिर कोलकाता में भी इसकी पहल होगी।

आपको बता दे , अल्पसंख्यक से ज्यादा आज सबसे ज्यादा पीड़ित वर्ग में महिला और छोटी लड़कियां शामिल है।आए दिन महिला और लड़कियाँ रेप , गैंगरेप , विनयभंग ,किडनेपिंग, मानव तस्करी जैसे कई मामलों में शिकार हो चुकी है। इतने बढ़ते ग्राफ को देखकर अग्निशस्त्र की प्रक्रिया के लिए कोई सामाजिक संस्था या धार्मिक संस्था आखिर क्यों नहीं आवाज़ उठाती?

सुप्रीम कोर्ट तक का मानना है की हर रोज 4 बलात्कार की घटना सामने आ रही है। दिल्ली में महज 6 महीनों में 720 घटनाएं सामने आई है। जिसमे 469 मामलों में पुलिस ने चार्जशीट फाइल की है।297 केसेस की अभी ट्रायल भी शुरू नहीं हुई। ऐसे भयावह स्थिति में अग्निशस्त्र की सबसे ज्यादा किसे जरूरत है महिला या अल्पसंख्यक (मुस्लिम समाज)?

 

वही दूसरी तरफ पूरे देश मे अल्पसंख्यक समाज में पारसी, ईसाई, बौद्ध , सिख, जैन समाज भी रहते हैं फिर इन्हें ऐसे अग्निशस्त्र की आवश्यकता क्यों नहीं पड़ती ऐसे तमाम सवाल सोशल मीडिया में इस कैम्प को लेकर उठाई जा रही है।

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