अब देश में अल्पसंख्यक नहीं बल्कि इन्हें है सबसे ज्यादा खतरा..

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अब देश में अल्पसंख्यक नहीं बल्कि इन्हें है सबसे ज्यादा खतरा..

2014 लोकसभा चुनावों के बाद से देश में असहिष्णुता काफी बढ़ चुकी है। यह बात सच भी है। मगर असहिष्णुता के शिकार अल्पसंख्यक नहीं बल्कि आरएसएस, विहिप और बीजेपी कार्यकर्ता है। यह कहना गलत नहीं होगा कि अब देश में अप्रत्यक्ष रूप से गृहयुद्ध जैसी स्थिति निर्माण हो चुकी है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश की जनता ने ही चुनकर दिया है। मगर देश के प्रधानमंत्री मोदी कई लोगों को चुभ रहे है।
इनके पद पर विराजमान होने के बाद से ही इनके समर्थकों पर हमलों की वारदातों में काफी वृद्धि देखने मिली है। यह हमला सिर्फ वैचारिक न होकर अब खुलकर हिंसा के रूप में सामने आ रही है।

मोदी के पक्ष में जो भी बोलेगा या उनका प्रचार करेगा उनपर धावा बोल दिया जा रहा है। मौखिक चर्चा हिंसा में तब्दील हो सकती है।

 

स्थिति इतनी भयंकर हो सकती है की यह द्वेष की भावना से कहीं देश मे गृहयुद्ध जैसी स्थिति न निर्माण हो जाए।
मोदी के खिलाफ कुछ धार्मिक संस्थाए खुलकर आग उगल रहे हैं।

 

यह आग से देश में ज्वालामुखी का स्वरूप धारण होने की संभावना है। सिर्फ 2 ही दिनों में 3 वारदाते सामने आई है। जिसमे बीजेपी कार्यकर्ता एवं मोदी प्रशंसको पर हमले की खबरे सामने आई है।
केरल ,कर्नाटक हो या तमिलनाडु , जम्मू कश्मीर ,छत्तीसगढ़ हो या बंगाल हर राज्य में दर्जनों हत्या एवं हिंसा के ग्राफ देखने मिलेंगे ।

उपाय :

1) हिंदू अल्पसंख्यक क्षेत्र में सीसीटीव ही नहीं बल्कि IB द्वारा हिन्दू कार्यकर्ता और बीजेपी कार्यकर्ता पर पैनी नजर रखनी चाहिए।

2) हर हिंदू कार्यकर्ता एवं बीजेपी कार्यकर्ता की सभी मामले CBI द्वारा जांच किए जाना चाहिए। क्योंकि यह लोग सबसे ज्यादा राजकीय षड्यंत्र के शिकार हो सकते हैं।

3) सभी हिंदू कार्यकर्ताओ एवं बीजेपी कार्यकर्ता को नॉन लीथल वेपन्स रखने की अनुमति मिले।

4) हेट स्पीच पर तुरंत कड़े कानून बनाया जाए।

5) हर धार्मिक संस्थाओं में सीसीटीव लगाए जाएं।

 

ब्लॉग : Anonymous

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