42 शहादतों के बावजूद क्यों बनाया जा रहा है जवानों को टारगेट ??

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42 शहादतों के बावजूद क्यों बनाया जा रहा है जवानों को ही टारगेट ??

42 शहादतों के बावजूद क्यों बनाया जा रहा है जवानों को टारगेट ??

लोगो के विचार उसी प्रकार बनते है जिस प्रकार का वह साहित्य एवं किताब पढ़ते है। वही प्रभाव प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का भी होता है। लोगो के विचारों पर पूरा नियंत्रण मीडिया का होता है।ऐसे वक्त में मीडिया की समाज मे बड़ी जवाबदेही होती है। क्योंकि समाज वही बनता है जो उसे दिखाया एवं परोसा जाता है।

पुलवामा हमलों के बाद पूरा देश शोक में डूबा है।सत्ता पक्ष ,विपक्ष एवं 130 करोड़ भारतीय सभी जवानों के साथ में है। मगर कुछ मीडिया चैनल 42 बलिदानियों की बात के साथ साथ कुछ नई कहानियां भी प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहे है।

जैश ए मोहम्मद आतंकी समूह  ने आदिल को अपने खूनी मंसूबों के लिए किस प्रकार  इस्तेमाल किया इसपर चर्चा न करने के बजाय पूरा ठीकरा हमारे जवानों के मथे मारने की कोशिश की जा रही है।

देशभर में एन्टी सोल्जर (Anti Soldier ) याने जवानों के खिलाफ भावनाएं बनाई जा रही है। इस प्रकार का नैरेटिव कुछ मीडिया चैनल द्वारा  जानबूझ कर बनाई जा रही है। जवानों के प्रति दुख जताने के बजाय आदिल ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया इस पर ज्यादा फोकस बनाया जा रहा है। मीडिया द्वारा ऐसे प्रस्तुत किया जा रहा है जैसे आदिल की सुसाइड बॉम्बिंग की मुख्य वजह आर्मी द्वारा पीटना था। इस तरह के पीटने के हादसों को सुसाइड बॉम्बिंग से जोड़ कर दिखाया जा रहा है। नैरेटिव ऐसे बनाया जा रहा है जैसे आदिल की भूमिका का मुख्य कारण पाकिस्तान नहीं बल्कि भारतीय सेना है।
आपको बता दे 90 के दशक में 3,50,000 लाख कश्मीरी हिन्दू कश्मीर से खदेड़े  गए जिसपर आज तक किसी भी मीडिया, राजनेताओं का ध्यान नही  दिया।सुप्रीम कोर्ट तक ने इस नरसंहार संबंधित याचिका सबूतों के अभाव में रद्द की थी। मगर आजतक किसी भी कश्मीरी ने न्याय के लिए हत्यार नही उठाये।

मीडिया के ऐसे नकारात्मक नैरेटिव से जवानों का मनोबल तो घटेगा ही। साथ साथ भारतीय सेना में यह अपमानस्पद बर्ताव का सीधा असर आर्मी रिक्रूटमेंट में देखने मिल सकता है। इतना ही नहीं ऐसे नैरेटिव से इन सुसाइड बॉम्बर्स का हौसला और बुलंद होगा और उन्हें कुछ ही सालों में ‘पोस्टर बॉय ‘(Poster boy ) या Freedom Fighter के रूप में बताया जाएगा। ऐसे में फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन के गलत इस्तेमाल से देश की सुरक्षा ,संप्रभुता एवं आर्मी रिक्रूटमेंट पर सीधा असर पड़ सकता है।

ऐसे मीडिया के वजह से सोशल मीडिया में काफी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की जा रही है। कुछ लोगो ने तोह फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन में मीडिया के लिए गाइड लाइन्स की भी मांग की है। जिससे देश की अखंडता फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन के आड़ में खतरे में न पड़ जाए।

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