300 लोगो ने भेजी रेलवे मंत्रालय को लिखित पेटिशन,मुंब्रा रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर हो मुंब्रादेवी स्टेशन

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300 लोगो ने भेजी रेलवे मंत्रालय को लिखित पेटिशन,मुंब्रा रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर हो मुंब्रादेवी स्टेशन

मुंब्रादेवी मंदिर से जुड़ा है मुंब्रा शहर का इतिहास

मुंब्रा का नाम वैसे तो कुछ ही साल ही पुराना है। मगर मुंब्रा शहर का असली इतिहास यहाँ के स्थानीय आगरी और कोळी समाज के लोगो से जुड़ा है।

आगरी समाज के भगत परिवार द्वारा मुंब्रा देवी की देख रेख करने का अहम किरदार निभाते हैं।इस मंदिर का इतिहास संभाजी राजे के कार्यकाल से है। इस मंदिर में छत्रपती संभाजी महाराज तक यहाँ आकर पूजा कर चुके है जिसका उल्लेख भी कई पुस्तको में पाया गया है।
संस्कृति और इतिहास को देखकर अब मुंब्रा शहर से करीबन 300 लोगो ने लिखित पेटिशन रेलवे मंत्रालय को भेजी जिसमे स्थानीय भूमिपुत्र के साथ साथ स्थानीय लोगो ने भी इस मामले पर अपने हस्ताक्षर देकर सहमति जताई है।

इस मुहिम में स्थानीय नेताओं का भी अप्रत्यक्ष सहयोग प्राप्त हुआ है जो मुंब्रा शहर का नाम मुंब्रा देवी रेलवे स्थानक के रूप में देखना चाहते हैं। सूत्रों के अनुसार , इस मुहिम में अहम भूमिका विहिप के आशीष कनौजिया और अन्य पदाधिकारी दिव्यांश राय , जयराम गुप्ता,दिव्यांश रॉय,गौरव सिह, जितेश, विकाश यादव,विकास पाल,सोनूपवार,दीपक,सूरज,दीपम,संदीप पाल, अमोल शिदे आदि नाम शामिल हैं।

हमने जब आशीष कनौजिया से बात की तो उन्होंने कहा की

यह काम बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था। मगर देर आए दुरुस्त आए। इस नाम को लेकर वैसे कुछ लोग सांप्रदायिकता का आरोप जरूर लगाएंगे की देवी शब्द लगाकर जानबूझकर शहर का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। मगर ऐसा बिल्कुल नहीं है क्योंकि कुछ दिनों पहले एक शासकीय अस्पताल का नाम हजरत फकरुद्दीन शाह बाबा के नाम पर रखा गया जिसपर हिन्दू समाज ने कोई आपत्ति नहीं जताई बल्कि मुस्लिम भावनाओं का आदर कर इसे मान लिया था। ऐसे में सांप्रदायिकता का आरोप लगाना बेबुनियाद है क्योंकि यह शहर सभी का है और सभी लोगो के विचारों का आदर होना आवश्यक है।”

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